About Gommatgiri

प्राक्रतिक सौंदर्य एवं शुद्ध पर्यावरण से परिपूर्ण सुप्रसिद्ध अतिशय तीर्थ गोम्मटगिरी, इंदौर नगर के पश्चिम मे देपालपुर मार्ग पर 9 कि.मी. की दूरी पर स्थित है|

गोम्मटगिरी क्षेत्र पर चौबीस जीनालय में कमलासन ध्यानस्थ चोबिस तीर्थकारो कि प्रतिमाओं का वर्ण, शास्त्रत विधि अनुसार साक्षात तीर्थकर के वर्ण अनुसार विराजमान किया गया है। सभी प्रतिमाएँ अतिमनोज्ञ एवं मनोहारी हैं। चौबीस के मध्य भाग में अतिधवल संगमरमर से निर्मित 21 फूट उतंग कर्मारिजवी गोम्मटेश भगवान बाहुबली की प्रतिमा स्थापित है जो भव्यात्माओं को उत्क्रष्ट ध्यानरथ मुद्रा का संदेश दे रही हैं। परिसर के दक्षिण भाग मे लाल पाषाण से निर्मित शिखरयुक्त विशाल हॉल मे प्राचीनतम कलाक्रति से संयुक्त मनोकामनापुरक भगवान महावीर की प्रतिमा स्थापित है।

चौबीस जिनालय के मध्य अष्टकोणीय 41 फूट उतंग मानस्तम्भ के मूलभाग एवं ऊपरी भाग में क्रमश: खडगासन व पद्मासन प्रतिमाएँ विराजमान हैं। विधान निलय का निर्माण सरसेठ स्वरूपचंद हुकुमचंद ट्रस्ट के द्वारा तथा त्यागी निवास का निर्माण श्रीमती सरयू बेन दफ्तरी द्वारा किया गया। चौबीसी परिसर के समीप अष्टधातु से निर्मित ओम बीजाक्षर में पंच परमेष्ठी प्रतिमाएँ स्थापित हैं। इसी परिसर के वाम भाग में प्राचीन आचार्यों के चरणचिन्ह व मूलाचार्य परंपरा के प्रेरणा आचार्य श्री कुन्द-कुन्द स्वामी की मूर्ति के साथ चरण चिन्ह स्थापित हैं। दक्षिण भाग में अर्वाचीन आचार्यों के चरण चिन्ह व श्रमण परंपरा के प्रकाश स्तम्भ चरित्र चक्रवर्ती आचार्य श्री शांतिसागरजी महाराज की स्टेच्यु के साथ चरण चिन्ह स्थापित हैं। समीप ही वात्सल्य रत्नाकर परम पूज्य आचार्य श्री विमलसागरजी महाराज की चरण छतरी निर्मित है।

गोम्मटगिरी क्षेत्र निर्माण के साथ ही मूल मंदिर में स्थापित वेदी में श्री आदिनाथ, श्री वासुपूज्य, श्री पार्श्वनाथ, श्री महावीरजी भगवान की सिद्धप्रतिमा एवं बाहुबली भगवान की प्रतिमाएँ विराजमन हैं। मंदिर में अन्य 3 वेदियो में आदिनाथ भगवान की विशाल प्रतिमा, रत्नमयी त्रिकाल चौबीसी सहित आदिनाथ प्रतिमा, हींकार बीजाक्षर मे विराजमान चौबीसी तीर्थकर प्रतिमाएँ स्थापित हैं।

आदिनाथ मंदिर के दक्षिण भाग में पूज्य मुनिश्री निर्वाणसागरजी महाराज की विशाल चरण छत्री स्थापित है। गोम्मटगिरी क्षेत्र के पूर्वभिमुख तलहटी में कलाक्रति से परिपूर्ण मंदिर वेदी में कमलासन पर 4 फूट श्वेत वर्ण, पद्मासन अतिमनोज्ञ आदिनाथ प्रतिमा के साथ श्री चंद्रप्रभ, श्री शांतिनाथ, श्री पार्श्वनाथ, श्री महावीर भगवान एवं पंचमेरु विराजमान हैं। श्वेत संगमरमर से निर्मित नक्काशी सहित मुख्य द्वार हैं। चौबीसी परिसर के उत्तर भाग में चारों अनुयोग के अति दुर्लभ ग्रंथ स्वाध्याय हेतु 14 अलमारियों में विराजमान हैं। जिनका पठन-पाठन मुनिराज त्यागीजन एवं विद्वान निरंतर करते हैं। जैन साहित्य का प्रकाशन प्रचार-प्रसार विक्रय श्री वीर निर्वाण ग्रंथ प्रकाशन समिति के माध्यम से किया जाता है।

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